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सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

पृष्ठ 216, कुल 504 में से

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श्री दादूवाणी-विश्वास का अंग 19 गोविन्द के गुण चिंत कर, नैन, बैन, पग, शीश। जिन मुख दिया कान, कर प्राणनाथ जगदीश ॥ 17 ॥ तन मन सौंज सँवार सब, राखै बिसवा बीस। सो साहिब सुमिरै नहीं, दादू भान हदीस ॥ 18 ॥ दादू सो साहब जनि विसरै, जिन घट दिया जीव। गर्भवास में राखिया, पालै पोषै पीव ॥ 19 ॥ दादू राजिक रिजक लिये खड़ा, देवे हाथों हाथ। पूरक पूरा पास है, सदा हमारे साथ ॥ 20 ॥ हिरदै राम सँभाल ले, मन राखै विश्वास। दादू समर्थ सांइयां, सब की पूरै आस ॥ 21 ॥ दादू सांई सबन को, सेवक ह्वै सुख देइ। अया मूढ मति जीव की, तो भी नाम न लेइ ॥ 22 ॥ दादू सिरजनहारा सबन का, ऐसा है समरथ। सोई सेवक ह्वै रह्या, जहाँ सकल पसारैं हत्थ ॥ 23 ॥ समर्थ साक्षीभूत धनि धनि साहिब तू बड़ा, कौन अनुपम रीत। सकल लोक सिर सांइयां, ह्वै कर रह्या अतीत ॥ 24 ॥ दादू हौं बलिहारी सुरति की, सबकी करै सँभाल। कीड़ी कुंजर पलक में, करता है प्रतिपाल ॥ 25 ॥ विश्वास दादू छाजन भोजन सहज में, संइयाँ देइ सो लेइ। तातैं अधिका और कुछ, सो तूं कांई करेइ ॥ 26 ॥ दादू टूका सहज का, संतोषी जन खाइ। मृतक भोजन, गुरुमुखी काहे कलपै जाइ ॥ 27 ॥ दादू भाड़ा देह का, तेता सहज विचार। जेता हरि बिच अंतरा, तेता सबै निवार ॥ 28 ॥

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