सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-विश्वास का अंग 19 दादू जल दल राम का, हम लेवैं परसाद । संसार का समझैं नहीं, अविगत भाव अगाध ॥ 29 ॥ परमेश्वर के भाव का, एक कणूँका खाइ । दादू जेता पाप था, भ्रम कर्म सब जाइ ॥ 30 ॥ दादू कौण पकावै, कौण पीसै, जहाँ तहाँ सीधा ही दीसै ॥ 31 ॥ दादू जे कुछ खुसी खुदाइ की, होवेगा सोई । पच पच कोई जनि मरै, सुन लीज्यो लोई ॥ 32 ॥ दादू छूट खुदाइ कहीं को नांही, फिरिहो पृथ्वी सारी । दूजी दहन दूर कर बौरै, साधू शब्द विचारी ॥ 33 ॥ दादू बिना राम कहीं को नांही, फिरिहो देश विदेसा । दूजी दहन दूर कर बौरै, सुनि यहु साधु संदेशा ॥ 34 ॥ दादू सिदक सबूरी साच गह, साबित राख यकीन । साहिब सौं दिल लाइ रहु, मुरदा ह्वै मसकीन ॥ 35 ॥ दादू अनवांछित टूका खात हैं, मर्महि लागा मन । नाम निरंजन लेत हैं, यों निर्मल साधु जन ॥ 36 ॥ अनबांछा आगे पड़े, खिरा विचार रू खाइ । दादू फिरै न तोड़ता, तरुवर ताक न जाइ ॥ 37 ॥ अनबांछा आगे पड़े, पीछे लेइ उठाइ । दादू के सिर दोष यहु, जे कुछ राम रजाइ ॥ 38 ॥ अनबांछी अजगैब की, रोजी गगन गिरास । दादू सत करि लीजिये, सो सांई के पास ॥ 39 ॥ कर्त्ता कसौटी मीठे का सब मीठा लागै, भावै विष भर देइ । दादू कड़वा ना कहै, अमृत कर कर लेइ ॥ 40 ॥
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