सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-विश्वास का अंग 19 विपति भली हरि नाम सौं, काया कसौटी दुख । राम बिना किस काम का, दादू संपति सुख ॥ 41 ॥ विश्वास संतोष दादू एक बेसास बिन, जियरा डावांडोल । निकट निधि दुःख पाइये, चिंतामणि अमोल ॥ 42 ॥ दादू बिन बेसासी जीयरा, चंचल नांही ठौर । निश्चय निश्चल ना रहे, कछू और की और ॥ 43 ॥ दादू होना था सो है रह्या, स्वर्ग न बांछी धाइ । नरक कनै थी ना डरी, हुआ सो होसी आइ ॥ 44 ॥ दादू होना था सो है रह्या, जनि बांछे सुख दुःख । सुख मांगे दुख आइसी, पै पीव न बिसारी मुख ॥ 45 ॥ दादू होना था सो है रह्या, जे कुछ किया पीव । पल बधै न छिन घटै, ऐसी जानी जीव ॥ 46 ॥ दादू होना था सो है रह्या, और न होवै आइ । लेना था सो ले रह्या, और न लिया जाइ ॥ 47 ॥ ज्यों रचिया त्यों होइगा, काहे को सिर लेह । साहिब ऊपरि राखिये, देख तमाशा येह ॥ 48 ॥ पतिव्रता निष्काम ज्यों जाणों त्यों राखियो, तुम सिर डाली राइ । दूजा को देखूं नहीं, दादू अनत न जाइ ॥ 49 ॥ ज्यों तुम भावै त्यों खुसी, हम राजी उस बात । दादू के दिल सिदक सौं, भावै दिन को रात ॥ 50 ॥ दादू करणहार जे कुछ किया, सो बुरा न कहना जाइ । सोई सेवक संत जन, रहबा राम रजाइ ॥ 51 ॥
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