सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-विश्वास का अंग 19 विश्वास-संतोष दादू कर्त्ता हम नहीं, कर्त्ता औरै कोइ। कर्त्ता है सो करेगा, तूं जनि कर्त्ता होइ ॥ 52 ॥ हरि भरोसा काशी तज मगहर गया, कबीर भरोसे राम। सैंदेही सांई मिल्या, दादू पूरे काम ॥ 53 ॥ दादू रोजी राम है, राजिक रिजक हमार। दादू उस प्रसाद सौं, पोष्या सब परिवार ॥ 54 ॥ पंच संतोषे एक सौं, मन मतिवाला मांहि। दादू भागी भूख सब, दूजा भावै नांहि ॥ 55 ॥ दादू साहिब मेरे कापड़े, साहिब मेरा खाण। साहिब सिर का ताज है, साहिब पिंड प्राण ॥ 56 ॥ विनती सांई सत संतोष दे, भाव भक्ति विश्वास। सिदक सबूरी साँच दे, माँगे दादू दास ॥ 57 ॥ इति श्री दादूदास-विरचिते सतगुरु-प्रसादेन प्रोक्तं भक्तियोगनाम तत्वसारमत-सर्वसाधुबुद्धिज्ञान-सर्वशास्त्र-शोधितं रामनाम सतगुरुशिक्षा धर्मशास्त्र-सत्योपदेश-ब्रह्मविद्यायां मनुष्य जीवनाम् नित्य-श्रवणं पठनं मोक्षदायकम् श्री दादूवाणीनाम् माहात्म्य उन्नीसवां विश्वास का अंग सम्पूर्ण ॥ अंग 19 ॥ साखी 57 ॥
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