भारतकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

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श्री दादूवाणी-समर्थता का अंग 21 दादू कर्त्ता करै तो निमष में, ठाली भरै भंडार। भरिया गह ठाली करै, ऐसा सिरजनहार ॥ 5 ॥ दादू धरती को अम्बर करै, अम्बर धरती होइ। निशि अँधियारी दिन करै, दिन को रजनी सोइ ॥ 6 ॥ मृतक काढ मसाण तैं, कहु कौन चलावै। अविगत गति नहिं जाणिये, जग आन दिखावै ॥ 7 ॥ दादू गुप्त गुण परगट करै, परगट गुप्त समाइ। पलक मांहि भानै घड़ै, ताकी लखी न जाइ ॥ 8 ॥ पोषपाल रक्षक दादू सोई सही साबित हुआ, जा मस्तक कर देइ। गरीब निवाजे देखतां, हरि अपना कर लेइ ॥ 9 ॥ सूक्ष्म मार्ग दादू सब ही मारग सांइयाँ, आगै एक मुकाम। सोई सन्मुख कर लिया, जाही सेती काम ॥ 10 ॥ पोष प्रतिपाल रक्षक मीरां मुझ सौं महर कर, सिर पर दीया हाथ। दादू कलियुग क्या करै, सांई मेरा साथ ॥ 11 ॥ ईश्वर समर्थाई दादू समर्थ सब विधि सांइयाँ, ताकी मैं बलि जाऊँ। अंतर एक जु सो बसै, औरां चित्त न लाऊँ ॥ 12 ॥ सूक्ष्म मार्ग दादू मार्ग महर का, सुखी सहज सौं जाइ। भवसागर तैं काढ कर, अपणे लिये बुलाइ ॥ 13 ॥ ईश्वर समर्थाई दादू जे हम चिन्तवैं, सो कछु न होवै आइ। सोई कर्त्ता सत्य है, कुछ औरै कर जाइ ॥ 14 ॥

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