सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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समर्थ का अंग अथ समर्थता का अंग २१ मंगलाचरण दादू नमो नमो निरंजनं, नमस्कार गुरुदेवतः । वन्दनं सर्व साधवा, प्रणामं पारंगत: ॥ 1 ॥ दादू कर्त्ता करै तो निमष मैं, कीड़ी कुंजर होइ । कुंजर तैं कीड़ी करै, मेट सकै नहिं कोइ ॥ 2 ॥ दादू कर्त्ता करै तो निमष में, राई मेरु समान । मेरु को राई करै, तो को मेटै फरमान ॥ 3 ॥ दादू कर्त्ता करै तो निमष में, जल मांही थल थाप । थल मांही जलहर करै, ऐसा समर्थ आप ॥ 4 ॥
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