सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-समर्थता का अंग 21
एकौं लेइ बुलाइ कर, एकौं देइ पठाइ। दादू अद्भुत साहिबी, क्यों ही लखी न जाइ ॥ 15 ॥ ज्यों राखै त्यों रहेंगे, अपने बल नांही। सबै तुम्हारे हाथ है, भाज कत जांही ॥ 16 ॥ दादू डोरी हरि के हाथ है, गल मांही मेरे। बाजीगर का बांदरा, भावै तहाँ फेरे ॥ 17 ॥ ज्यों राखै त्यों रहेंगे, मेरा क्या सारा। हुक्मी सेवक राम का, बन्दा बेचारा ॥ 18 ॥ साहिब राखै तो रहे, काया मांही जीव। हुक्मी बन्दा उठ चले, जब ही बुलावे पीव ॥ 19 ॥ पति पहचान खंड खंड प्रकाश है, जहाँ तहाँ भरपूर। दादू कर्त्ता कर रह्या, अनहद बाजै तूर ॥ 20 ॥ ईश्वर समर्थाई दादू दादू कहत हैं, आपै सब घट मांहि। अपनी रुचि आपै कहैं, दादू तैं कुछ नांहि ॥ 21 ॥ दादू हम तैं हुआ न होइगा, ना हम करणे जोग। ज्यों हरि भावै त्यों करै, दादू कहैं सब लोग ॥ 22 ॥ दादू दूजा क्यों कहै, सिर पर साहिब एक। सो हम कौं क्यों बीसरै, जे जुग जाहिं अनेक ॥ 23 ॥ समर्थ साक्षीभूत आप अकेला सब करै, औरों के सिर देइ। दादू शोभा दास को, अपना नाम न लेइ ॥ 24 ॥ आप अकेला सब करै, घट में लहरि उठाइ। दादू सिर दे जीव के, यों न्यारा ह्वै जाइ ॥ 25 ॥
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