भारतकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

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श्री दादूवाणी-जीवित मृतकका अंग 23 मेरे आगे मैं खड़ा, ता तैं रह्या लुकाइ । दादू प्रकट पीव है, जे यहु आपा जाइ ॥ 17 ॥ सूक्ष्म-मार्ग दादू जीवित मृतक होइ कर, मारग मांही आव । पहली शीश उतार कर, पीछे धरिये पांव ॥ 18 ॥ दादू मारग साधु का, खरा दुहेला जान । जीवित मृतक ह्वै चलै, राम नाम नीशान ॥ 19 ॥ दादू मारग कठिन है, जीवित चलै न कोइ । सोई चलि है बापुरा, जो जीवित मृतक होइ ॥ 20 ॥ मृतक होवै सो चलै, निरंजन की बाट। दादू पावै पीव को, लंघै औघट घाट ॥ 21 ॥ जीवित मृतक दादू मृतक तब ही जानिये, जब गुण इंद्रिय नांहि । जब मन आपा मिट गया, तब ब्रह्म समाना मांहि ॥ 22 ॥ दादू जीवित ही मर जाइये, मर माँही मिल जाइ । सांई का संग छाड़ कर, कौन सहै दुख आइ ॥ 23 ॥ उभय निर्दोष दादू आपा कहा दिखाइये, जे कुछ आपा होइ । यहु तो जाता देखिये, रहता चीन्हों सोइ ॥ 24 ॥ दादू आप छिपाइये, जहाँ न देखै कोइ । पीव को देख दिखाइये, त्यों त्यों आनन्द होइ ॥ 25 ॥ आपा निर्दोष दादू अंतरगति आपा नहीं, मुख सौं मैं तैं होइ । दादू दोष न दीजिये, यों मिल खेलैं दोइ ॥ 26 ॥ जे जन आपा मेट कर, रहें राम ल्यौ लाइ । दादू सब ही देखतां, साहिब सौं मिल जाइ ॥ 27 ॥

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