भारतकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

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श्री दादूवाणी-काल का अंग 25 दादू काया कारवीं, मोहि भरोसा नांहि। आसन कुंजर शिर छत्र, विनश जाहिं क्षण मांहि ॥ 17 ॥ दादू काया कारवीं, पड़त न लागै बार। बोलणहारा महल में, सो भी चालणहार ॥ 18 ॥ दादू काया कारवीं, कदे न चालै संग। कोटि वर्ष जे जीवना, तऊ होइला भंग ॥ 19 ॥ कहतां, सुनतां, देखतां, लेतां, देतां प्राण। दादू सो कतहूँ गया, माटी धरी मसाण ॥ 20 ॥ सींगी नाद न बाजहि, कत गये सो जोगी। दादू रहते मढी में, करते रस भोगी ॥ 21 ॥ दादू जियरा जायगा, यहु तन माटी होइ। जे उपज्या सो विनश है, अमर नहीं कलि कोइ ॥ 22 ॥ दादू देही देखतां, सब किसही की जाइ। जब लग श्वास शरीर में, गोविन्द के गुण गाइ ॥ 23 ॥ दादू देही पाहुणी, हंस बटाऊ मांहि। का जाणूं कब चालसी, मोहि भरोसा नांहि ॥ 24 ॥ दादू सबको पाहुणा, दिवस चार संसार। औसर औसर सब चले, हम भी इहै विचार ॥ 25 ॥ भयमय पंथ बिख्रमता सबको बैठे पंथ सिर, रहे बटाऊ होइ। जे आये ते जाहिंगे, इस मारग सब कोइ ॥ 26 ॥ बेग बटाऊ पंथ सिर, अब विलम्ब न कीजे। दादू बैठा क्या करे, राम जप लीजे ॥ 27 ॥ संझ्या चलै उतावला, बटाऊ वन-खंड मांहि। बरियाँ नांहीं ढील की, दादू बेगि घर जांहि ॥ 28 ॥

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