भारतकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

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श्री दादूवाणी-काल का अंग 25 दादू विषै सुख मांहि खेलतां, काल पहुँचा आइ। उपजै विनशै देखतां, यहु जग यों ही जाइ ॥ 52 ॥ राम नाम बिन जीव जे, केते मुये अकाल। मीच बिना जे मरत हैं, तातैं दादू साल ॥ 53 ॥ कठोरता सर्प सिंह हस्ती घणा, राक्षस भूत प्रेत। तिस वन में दादू पड़या, चेतै नहीं अचेत ॥ 54 ॥ पूत पिता थैं बीछुट्या, भूलि पड़या किस ठौर। मरै नहिं उर फाट कर, दादू बड़ा कठोर ॥ 55 ॥ काल चेतावनी जे दिन जाइ सो बहुरि न आवै, आयु घटै तन छीजै। अंतकाल दिन आइ पहुंता, दादू ढील न कीजै ॥ 56 ॥ दादू अवसर चल गया, बरियाँ गई बिहाइ। कर छिटके कहँ पाइये, जन्म अमोलक जाइ ॥ 57 ॥ दादू गाफिल है रह्या, गहिला हुवा गँवार। सो दिन चित्त न आवई, सोवै पांव पसार ॥ 58 ॥ दादू काल हमारा कर गहै, दिन दिन खैंचत जाइ। अजहुं जीव जागै नहीं, सोवत गई बिहाइ ॥ 59 ॥ सूता आवै सूता जाइ, सूता खेले सूता खाइ। सूता लेवै सूता देवै, दादू सूता जाइ ॥ 60 ॥ दादू देखत ही भया, श्याम वर्ण तैं सेत। तन मन यौवन सब गया, अजहुँ न हरि सौं हेत ॥ 61 ॥ दादू झूठे के घर देख कर, झूठे पूछे जाइ। झूठे झूठा बोलते, रहे मसाणों आइ ॥ 62 ॥

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