भारतकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

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श्री दादूवाणी-काल का अंग 25 दादू प्राण पयाना कर गया, माटी धरी मसाण । जालणहारे देखकर, चेतैं नहीं अजाण ॥ 63 ॥ दादू केई जाले केई जालिये, केई जालण जांहि । केई जालन की करैं, दादू जीवन नांहि ॥ 64 ॥ केई गाड़े केई गाड़िये, केई गाडण जांहि । केई गाड़ण की करैं, दादू जीवन नांहिं ॥ 65 ॥ दादू कहै-उठ रे प्राणी जाग जीव, अपना सजन संभाल । गाफिल नींद न कीजिये, आइ पहुंचा काल ॥ 66 ॥ समर्थ का शरणा तजै, गहै आन की औट । दादू बलवंत काल की, क्यों कर बंचै चोट ॥ 67 ॥ सजीव अविनाशी के आसरे, अजरावर की ओट । दादू शरणैं सांच के, कदे न लागै चोट ॥ 68 ॥ काल चेतावनी मूसा भागा मरण तैं, जहाँ जाइ तहाँ गोर । दादू स्वर्ग पयाल में, कठिन काल का शोर ॥ 69 ॥ सब मुख मांही काल के, मांड्या माया जाल । दादू गोर मसाण में, झंखे स्वर्ग पयाल ॥ 70 ॥ दादू मड़ा मसाण का, केता करै डफान । मृतक मुर्दा गोर का, बहुत करै अभिमान ॥ 71 ॥ राजा राणा राव मैं, मैं खानों सिर खान । माया मोह पसारै एता, सब धरती आसमान ॥ 72 ॥ पंच तत्त्व का पूतला, यहु पिंड सँवारा । मंदिर माटी मांस का, बिनशत नहिं बारा ॥ 73 ॥ हाड़ चाम का पिंजरा, बिच बोलणहारा । दादू तामें पैस कर, बहुत किया पसारा ॥ 74 ॥

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