सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-पारिख का अंग 27 खरी कसौटी कीजिये, वाणी बधती जाइ। दादू साचा परखिये, महँगे मोल बिकाइ ॥ 37 ॥ दादू राम कसै सेवक खरा, कदे न मोड़ै अंग। दादू जब लग राम है, तब लग सेवक संग ॥ 38 ॥ दादू कस कस लीजिये, यहु ताते परिमान। खोटा गाँठ न बाँधिये, साहिब के दीवान ॥ 39 ॥ खरी कसौटी पीव की, कोई बिरला पहुँचनहार। जे पहुँचे ते ऊबरे, ताइ किये तत सार ॥ 40 ॥ दुर्बल देही निर्मल वाणी, दादू पंथी ऐसा जाणी। काहू जीव विरोधे नांही, परमेश्वर देखे सब माँही ॥ 41 ॥ दादू साहिब कसै सेवक खरा, सेवक को सुख होइ। साहिब करै सो सब भला, बुरा न कहिये कोइ ॥ 42 ॥ दादू ठग आमेर में, साधौं सौं कहियो। हम शरणाई राम की, तुम नीके रहियो ॥ 43 ॥ इति श्री दादूदास-विरचिते सतगुरु-प्रसादेन प्रोक्तं भक्तियोगनाम तत्वसारमत-सर्वसाधुर्बुद्धिज्ज्ञान-सर्वशास्त्र-शोधितं रामनाम सतगुरुशिक्षा धर्मशास्त्र-सत्योपदेश-ब्रह्मविद्यायां मनुष्य जीवनाम् नित्य-श्रवणं पठनं मोक्षदायकम् श्री दादूवाणीनाम् माहात्म्य सत्ताईसवां पारिख कअंग सम्पूर्ण ॥ अंग 27 ॥ साखी 43 ॥
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