भारतकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

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श्री दादूवाणी-पारिख का अंग 27 साचे को साचा कहै, झूठे को झूठा। दादू दुविधा को नहीं, ज्यों था त्यों दीठा ॥ 27 ॥ पारिख अपारिख दादू हीरे को कंकर कहैं, मूरख लोग अजान। दादू हीरा हाथ ले, परखैं साधु सुजान ॥ 28 ॥ हीरा कौड़ी ना लहै, मूरख हाथ गँवार। पाया पारख जौहरी, दादू मोल अपार ॥ 29 ॥ अंधे हीरा परखिया, किया कौडी मोल। दादू साधू जौहरी, हीरे मोल न तोल ॥ 30 ॥ सगुरा निगुरा सगुरा निगुरा परखिये, साध कहैं सब कोइ। सगुरा साचा, निगुरा झूठा, साहिब के दर होइ ॥ 31 ॥ सगुरा सत संयम रहै, सन्मुख सिरजनहार। निगुरा लोभी लालची, भूंचै विषय विकार ॥ 32 ॥ कर्त्ता कसौटी खोटा खरा परखिये, दादू कस-कस लेइ। साचा है सो राखिये, झूठा रहण न देइ ॥ 33 ॥ पारिख अपारिख खोटा खरा कर देवै पारिख, तो कैसे बन आवै। खरे खोटा का न्याय नबेरे, साहिब के मन भावै ॥ 34 ॥ दादू जिन्हें ज्यों कही, तिन्हें त्यों मानी, ज्ञान विचार न कीन्हा। खोटा खरा जीव परख न जानै, झूठ सच करि लीन्हा ॥ 35 ॥ कर्त्ता कसौटी जे निधि कहीं न पाइये, सो निधि घर-घर आहि। दादू महँगे मोल बिन, कोई न लेवे ताहि ॥ 36 ॥

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