सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
DevanagariHindipublished504 पृष्ठ
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श्री दादूवाणी-उपजन का अंग 28 परिचय जिज्ञासा उपदेश पारब्रह्म कह्या प्राण सौं, प्राण कह्या घट सोइ । दादू घट सब सौं कह्या, विष अमृत गुण दोइ ॥ 15 ॥ दादू मालिक कह्या अरवाह सौं, अरवाह कह्या औजूद । औजूद आलम सौं कह्या, हुकम खबर मौजूद ॥ 16 ॥ दादू जैसा ब्रह्म है, तैसी अनुभव उपजी होइ । जैसा है तैसा कहै, दादू विरला कोइ ॥ 17 ॥ इति श्री दादूदास-विरचिते सतगुरु-प्रसादेन प्रोक्तं भक्ति योगनाम तत्वसारमत-सर्वसाधुर्बुद्धिज्ञान-सर्वशास्त्र-शोधितं रामनाम सतगुरुशिक्षा धर्मशास्त्र-सत्योपदेश-ब्रह्मविद्यायां मनुष्य जीवनाम् नित्य-श्रवणं पठनं मोक्षदायकम् श्री दादूवाणीनाम् माहात्म्य अट्ठाईसवां उपजन काअंग सम्पूर्ण ॥ अंग 28 ॥ साखी 17 ॥
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