भारतकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

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श्री दादूवाणी-विनती का अंग 34 राखणहारा राख तूँ, यहु मन मेरा राखि । तुम बिन दूजा को नहीं, साधू बोलैं साखि ॥ 17 ॥ माया विषय विकार तैं, मेरा मन भागे । सोई कीजे साँईयाँ, तूँ मीठा लागे ॥ 18 ॥ साँई दीजे सो रति, तूँ मीठा लागे । दूजा खारा होइ सब, सूता जीव जागे ॥ 19 ॥ ज्यों आपै देखे आपको, सो नैना दे मुझ । मीरां मेरा मेहर कर, दादू देखे तुझ ॥ 20 ॥ विनती दादू पछतावा रह्या, सके न ठाहर लाइ । अर्थ न आया राम के, यहु तन योंही जाइ ॥ 21 ॥ दादू कहै- दिन दिन नवतम भक्ति दे, दिन दिन नवतम नांव । दिन दिन नवतम नेह दे, मैं बलिहारी जांव ॥ 22 ॥ साँई संशय दूर कर, कर शंका का नाश । भान भ्रम दुविध्या दुख दारुण, समता सहज प्रकाश ॥ 23 ॥ दया विनती नांही प्रकट ह्वै रह्या, है सो रह्या लुकाइ । संइयाँ पड़दा दूर कर, तूँ ह्वै प्रकट आइ ॥ 24 ॥ दादू माया प्रकट ह्वै रही, यों जे होता राम । अरस परस मिल खेलते, सब जीव सब ही ठाम ॥ 25 ॥ दया करै तब अंग लगावै, भक्ति अखंडित देवै । दादू दर्शन आप अकेला, दूजा हरि सब लेवै ॥ 26 ॥ दादू साध सिखावैं आत्मा, सेवा दिढ कर लेहु । पारब्रह्म सौं विनती, दया कर दर्शन देहु ॥ 27 ॥

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