भारतकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

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श्री दादूवाणी-विनती का अंग 34 पिंड परोहन सिन्धु जल, भव सागर संसार । राम बिना सूझै नहीं, दादू खेवनहार ॥ 39 ॥ यहु घट बोहित धार में, दरिया वार न पार । भैभीत भयानक देखकर, दादू करी पुकार ॥ 40 ॥ कलियुग घोर अंधार है, तिसका वार न पार । दादू तुम बिन क्यों तिरै, समर्थ सिरजनहार ॥ 41 ॥ काया के वश जीव है, कस कस बँध्या मांहि । दादू आत्माराम बिन, क्यों ही छूटै नांहि ॥ 42 ॥ दादू प्राणी बँध्या पंच सौं, क्योंही छूटै नांहि । निधणी आया मारिये, यहु जीव काया मांहि ॥ 43 ॥ तुम बिन धणी न धोरी जीव का, यों ही आवै जाइ । जे तूँ साँई सत्य है, तो बेगा प्रकटहु आइ ॥ 44 ॥ निधणी आया मारिये, धणी न धोरी कोइ । दादू सो क्यूं मारिये, साहिब सिर पर होइ ॥ 45 ॥ दया विनती राम विमुख जुग जुग दुखी, लख चौरासी जीव । जामै मरै जग आवटै, राखणहारा पीव ॥ 46 ॥ पोष प्रति पाल रक्षक समर्थ सिरजनहार है, जे कुछ करै सो होइ । दादू सेवक राख ले, काल न लागै कोइ ॥ 47 ॥ विनती साँई साचा नाम दे, काल झाल मिट जाइ । दादू निर्भय ह्वै रहे, कबहूँ काल न खाइ ॥ 48 ॥ कोई नहिं करतार बिन, प्राण उधारणहार । जियरा दुखिया राम बिन, दादू इहि संसार ॥ 49 ॥

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