सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-साक्षीभूत का अंग 35 कर्त्ता साक्षीभूत करता है सो करेगा, दादू साक्षीभूत। कौतिकहारा ह्वै रह्या, अणकर्ता अवधूत ॥ 4 ॥ दादू राजस कर उत्पत्ति करै, सात्विक कर प्रतिपाल। तामस कर परलै करै, निर्गुण कौतिकहार ॥ 5 ॥ दादू ब्रह्म जीव हरि आत्मा, खेलैं गोपी कान्ह। सकल निरन्तर भर रह्या, साक्षीभूत सुजान ॥ 6 ॥ स्वकीय मित्र-शत्रुता दादू जामण मरणा सान कर, यहु पिंड उपाया। साँईं दिया जीव को, ले जग में आया ॥ 7 ॥ दादू विष अमृत सब पावक पाणी, सतगुरु समझाया। मनसा वाचा कर्मणा, सोई फल पाया ॥ 8 ॥ दादू जानै बूझै जीव सब, गुण औगुण कीजे। जान बूझ पावक पड़ै, दई दोष न दीजे ॥ 9 ॥ मन ही मांहीं ह्वै मरै, जीवै मन ही मांहि। साहिब साक्षीभूत है, दादू दूषण नांहि ॥ 10 ॥ बुरा बला सिर जीव के, होवै इस ही मांहि। दादू कर्त्ता कर रह्या, सो सिर दीजै नांहि ॥ 11 ॥ साधु साक्षीभूत कर्त्ता ह्वै कर कुछ करै, उस मांहि बँधावै। दादू उसको पूछिये, उत्तर नहीं आवै ॥ 12 ॥ दादू केई उतारैं आरती, केई सेवा कर जांहि। केई आइ पूजा करैं, केई खिलावैं खांहि ॥ 13 ॥ केई सेवक ह्वै रहे, केई साधु संगति मांहि। केई आइ दर्शन करैं, हम तैं होता नांहि ॥ 14 ॥
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