भारतकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

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श्री दादूवाणी-साक्षीभूत का अंग 35 ना हम करैं करावैं आरती, ना हम पिवैं पिलावैं नीर । करै करावै सांइयाँ, दादू सकल शरीर ॥ 15 ॥ करै करावै सांइयाँ, जिन दिया औजूद । दादू बन्दा बीच में, शोभा को मौजूद ॥ 16 ॥ देवै लेवै सब करै, जिन सिरजे सब कोइ । दादू बन्दा महल में, शोभा करैं सब कोइ ॥ 17 ॥ कर्त्ता साक्षीभूत दादू जुवा खेले जाणराइ, ताको लखै न कोइ । सब जग बैठा जीत कर, काहू लिप्त न होइ ॥ 18 ॥ इति श्री दादूदास-विरचिते सतगुरु-प्रसादेन प्रोक्तं भक्तियोगनाम तत्वसारमत-सर्वसाधुर्बुद्धिज्ञान-सर्वशास्त्र-शोधितं रामनाम सतगुरुशिक्षा धर्मशास्त्र-सत्योपदेश-ब्रह्मविद्यायां मनुष्य जीवनाम् नित्य-श्रवणं पठनं मोक्षदायकम् श्री दादूवाणीनाम् माहात्म्य पैंतीसवां साक्षीभूत काअंग सम्पूर्ण ॥ अंग 35 ॥ साखी 18 ॥

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