भारतकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

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श्री दादूवाणी-राग गौड़ी 1 दीन दयाल दया कर जोइ, सब सुख आनंद तुम्ह तैं होइ ॥ 2 ॥ जन्म-जन्म के बन्धन खोइ, देखन दादू अहिनिशि रोइ ॥ 3 ॥ 19. स्पर्श विनती । द्वितीय ताल संग न छाडूं मेरा पावन पीव, मैं बलि तेरे जीवन जीव ॥ टेक ॥ संग तुम्हारे सब सुख होहि, चरण कमल मुख देखूं तोहि ॥ 1 ॥ अनेक जतन कर पाया सोइ, देखूं नैनहुँ तो सुख होइ ॥ 2 ॥ शरण तुम्हारी अंतर वास, चरण कमल तहँ देहु निवास ॥ 3 ॥ अब दादू मन अनत न जाइ, अंतर वेधि रह्यो ल्यौ लाइ ॥ 4 ॥ 20. परिचय विनती (गुजराती भाषा) । त्रिताल नहीं मेल्हूँ , राम ! नहीं मेल्हूँ , मैं शोधि लीधो नहीं मेल्हूँ, चित्त तुम्ह सूं बांधूं नहीं मेल्हूँ ॥ टेक ॥ हूँ तारे काजे तालाबेली, हवे केम मने जाशे मेल्ही ॥ 1 ॥ साहसि तूं ने मनसों गाढो, चरण समानों केवी पेरे काढो ॥ 2 ॥ राखिश हदे तूं मारो स्वामी, मैं दुहिले पाम्यों अंतरजामी ॥ 3 ॥ हवे न मेल्हूँ तूं स्वामी मारो, दादू सन्मुख सेवक तारो ॥ 4 ॥ 21. परिचय करुणा विनती । दादरा राम ! सुनहु न विपति हमारी हो, तेरी मूरति की बलिहारी हो ॥ टेक ॥ मैं जु चरण चित चाहना, तुम सेवक साधारना ॥ 1 ॥ तेरे दिन प्रति चरण दिखावना, कर दया अंतर आवना ॥ 2 ॥ जन दादू विपति सुनावना, तुम गोविन्द तपत बुझावना ॥ 3 ॥ 22. परिचय विनती-प्रश्न । द्रुताली कौण भांति भल मानैं गुसाँई, तुम्ह भावे सो मैं जानत नांहीं ॥ टेक ॥

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