सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-राग गौड़ी 1 24. उपदेश चेतावनी । एकताल कैसे जीविये रे, साँई संग न पास ? चंचल मन निश्चल नहीं, निशिदिन फिरे उदास ॥ टेक ॥ नेह नहीं रे राम का, प्रीति नहीं परकाश । साहिब का सुमिरण नहीं, करे मिलन की आश ॥ 1 ॥ जिस देखे तूँ फूलिया रे, पाणी पिंड बधाणां मांस । सो भी जल-बल जाइगा, झूठा भोग विलास ॥ 2 ॥ तो जीवीजे जीवणां, सुमरै श्वासै श्वास । दादू प्रकट पीव मिलै, तो अंतर होइ उजास ॥ 3 ॥ 25. हितोपदेश । चटताल जियरा मेरे सुमिर सार, काम क्रोध मद तज विकार ॥ टेक ॥ तूँ जनि भूले मन गँवार, शिर भार न लीजे मान हार ॥ 1 ॥ सुन समझायो बार-बार, अजहूँ न चेतै, हो हुसियार ॥ 2 ॥ कर तैसे भव तिरिये पार, दादू अब तैं यही विचार ॥ 3 ॥ 26. (क)-भय चेतावनी । त्रिताल जियरा, चेत रे जनि जारे । हे जैं हरि सौं प्रीति न कीन्ही, जन्मअमोलक हारे ॥ टेक ॥ बेर बेर समझायो रे जियरा, अचेत न होइ गंवारे । यहु तन है कागद की गुड़िया, कछु इक चेत विचारे ॥ 1 ॥ तिल तिल तुझको हानि होत है, जे पल राम बिसारे । भय भारी दादू के जिय में, कहु कैसे कर डारे ॥ 2 ॥ 26 (ख) पंजाबी त्रिताल जियरा काहे रे मूढ डोले ? वनवासी लाला पुकारे, तूँही तूँही कर बोले ॥ टेक ॥
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