भारतकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

पृष्ठ 337, कुल 504 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 337

श्री दादूवाणी-राग माली गौड़ 2 करम करीमा कीजिये, मिल पीव पियारे ॥ 1 ॥ शूल सुलाको सो सहूँ, तेग तन मारे । मिल सांई सुख दीजिये, तूँ ही तूँ संभारे ॥ 2 ॥ मैं शुहदा तन सोखता, विरहा दुख जारे । जिय तरसै दीदार को, दादू न विसारे ॥ 3 ॥ ४5. शंखताल (फारसी) संइयां तूँ है साहिब मेरा, मैं हूँ बन्दा तेरा ॥ टेक ॥ बन्दा वरदा चेरा तेरा, हुकमी मैं बेचारा । मीरां मेहरबान गुसांई, तूँ सिरताज हमारा ॥ 1 ॥ गुलाम तुम्हारा मुल्ला जादा, लौंडा घर का जाया । राजिक रिजक जीव तैं दिया, हुकम तुम्हारे आया ॥ 2 ॥ शादील बै हाजिर बंदा, हुकम तुम्हारे मांही । जब ही बुलाया तब ही आया, मैं मेवासा नांही ॥ 3 ॥ खसम हमारा सिरजनहारा, साहिब समर्थ सांई । मीरां मेरा मेहर मया कर, दादू तुम ही तांई ॥ 4 ॥ ४6. करुणा । शंखताल मुझ थीं कुछ न भया रे, यहु योंही गया रे, पछतावा रह्या रे ॥ टेक ॥ मै शीश न दीया रे, भर प्रेम न पीया रे, मैं क्या कीया रे ॥ 1 ॥ हौं रंग न राता रे, रस प्रेम न माता रे, नहिं गलित गाता रे ॥ 2 ॥ मैं पीव न पाया रे, कीया मन का भाया रे, कुछ होइ न आया रे ॥ 3 ॥ हौं रहूँ उदासा रे, मुझे तेरी आशा रे, कहै दादू दासा रे ॥ 4 ॥ ४7. वैराग्य उपदेश । निसारुक ताल मेरा मेरा छाड़ गँवारा, सिर पर तेरे सिरजनहारा ।

  • 337 -