सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-राग केदार 6 साथीजी साथे थइ ने, पेली तीरे पार तरूं ॥ 1 ॥ पीव पाखे दिन दुहेला जाये, घड़ी बरसां सौं केम भरूं। दादू रे जन हरि गुण गाता, पूरण स्वामी ते वरूं ॥ 2 ॥ 126. विरह विलाप । झपताल मरिये मीत विछोहे, जियरा जाइ अंदोहे ॥ टेक ॥ ज्यों जल विछुरे मीना, तलफ तलफ जिय दीन्हा, यों हरि हम सौं कीन्हा ॥ 1 ॥ चातक मरै पियासा, निशदिन रहै उदासा, जीवै किहि बेसासा ॥ 2 ॥ जल बिन कमल कुम्हलावै, प्यासा नीर न पावै, क्यों कर तृषा बुझावै ॥ 3 ॥ मिल जनि बिछुरो कोई, बिछुरे बहु दुख होई, क्यों कर जीवै जन सोई ॥ 4 ॥ मरणा मीत सुहेला, बिछुरन खरा दुहेला, दादू पीव सौं मेला ॥ 5 ॥ 127. त्रिताल पीव ! हौं कहा करूँ रे, पाइ परूं के प्राण हरूं रे, अब हौं मरणे नांहि डरूं रे ।। टेक ।। गाल मरूं कै, जालि मरूं रे, कै हौं करवत शीश धरूं रे ।। 1 ।। खाइ मरूं कै घाइ मरूं रे, कै हौं कतहूँ जाइ मरूं रे ।। 2 ।। तलफ मरूं कै झूरी मरूं रे, कै हौं विरही रोइ मरूं रे ।। 3 ।। टेरि कह्या मैं मरण गह्या रे, दादू दुखिया दीन भया रे ।। 4 ।। 128. गुजराती भाषा । त्रिताल वाहला हौं जाणूं जे रंग भर रमिये, मारो नाथ निमिष नहिं मेलूँ रे । अंतरजामी नाह न आवे, ते दिन आव्यो छैलो रे ।। टेक ।। वाहला सेज हमारी एकलड़ी रे, तहँ तुजने केम न पामों रे। आ दत्त हमारो पूरबलो रे, तेतो आव्यो सामों रे ।। 1 ।। वाहला मारा हृदया भीतर केम न आवै, मने चरण विलम्ब न दीजे रे।
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