भारतकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

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श्री दादूवाणी-राग मारू 7 144. झपताल मना, जप राम नाम कहिये । राम नाम मन विश्राम, संगी सो गहिये ॥ टेक॥ जाग जाग सोवे कहा, काल कंध तेरे । बारम्बार कर पुकार, आवत दिन नेरे ॥ 1 ॥ सोवत सोवत जन्म बीते, अजहूँ न जीव जागे । राम सँभार नींद निवार, जन्म जुरा लागे ॥ 2 ॥ आस पास भरम बँध्यो, नारी गृह मेरा । अंत काल छाड़ चल्यो, कोई नहिं तेरा ॥ 3 ॥ तज काम क्रोध मोह माया, राम राम करणा । जब लग जीव प्राण पिंड, दादू गहि शरणा ॥ 4 ॥ 145. विरह । अङ्गुताल क्यों विसरै मेरा पीव पियारा, जीव की जीवन प्राण हमारा ॥ टेक॥ क्यों कर जीवै मीन जल बिछुरै, तुम्ह बिन प्राण सनेही । चिन्तामणि जब कर तैं छूटै, तब दुख पावै देही ॥ 1 ॥ माता बालक दूध न देवै, सो कैसे कर पीवै । निर्धन का धन अनत भुलाना, सो कैसे कर जीवै ॥ 2 ॥ बरषहु राम सदा सुख अमृत, नीझर निर्मल धारा । प्रेम पियाला भर भर दीजे, दादू दास तुम्हारा ॥ 3 ॥ 146. अत्यन्त विरह (गुजराती भाषा) । अङ्गुताल कोई कहो रे मारा नाथ ने, नारी नैण निहारे बाट रे ॥ टेक॥ दीन दुखिया सुन्दरी, करुणा वचन कहे रे । तुम बिन नाह विरहणी व्याकुल, केम कर नाथ रहे रे ॥ 1 ॥ भूधर बिन भावे नहिं कोई, हरि बिन और न जाणे रे ।

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