सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-राग मारू 7 160. उदीक्षण । ताल मन बावरे हो, अनत जनि जाइ, तो तूँ जीवै अमीरस पीवै, अमर फल काहे न खाइ ॥ टेक ॥ रहु चरण शरण सुख पावै, देखहु नैन अघाइ। भाग तेरे पीव नेरे, थीर थान बताइ ॥ 1 ॥ संग तेरे रहै घेरे, सहजैं अंग समाइ। शरीर मांही शोध सांई, अनहद ध्यान लगाइ ॥ 2 ॥ पीव पास आवै सुख पावै, तन की तप्त बुझाइ। दादू रे जहाँ नाद ऊपजै, पीव पास दिखाइ ॥ 3 ॥ 161. भ्रम विध्वंसन । उदीक्षण ताल निरंजन अंजन कीन्हा रे, सब आतम लीन्हा रे ॥ टेक ॥ अंजन माया अंजन काया, अंजन छाया रे । अंजन राते अंजन माते, अंजन पाया रे ॥ 1 ॥ अंजन मेरा अंजन तेरा, अंजन मेला रे । अंजन लीया अंजन दीया, अंजन खेला रे ॥ 2 ॥ अंजन देवा अंजन सेवा, अंजन पूजा रे । अंजन ज्ञाना अंजन ध्याना, अंजन दूजा रे ॥ 3 ॥ अंजन वक्ता अंजन श्रोता, अंजन भावै रे । अंजन राम निरंजन कीन्हा, दादू गावै रे ॥ 4 ॥ 162. निज वचन । महिमा चौताल ध्रुपद में ऐन बैन चैन होवै, सुणतां सुख लागै रे । तीन गुण त्रिविधि तिमिर, भरम करम भागै रे ॥ टेक ॥ होइ प्रकास अति उजास, परम तत्व सूझै । परम सार निर्विकार, विरला कोई बूझै ॥ 1 ॥
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