सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-राग रामकली 8 184. मन प्रति उपदेश । राज मृगांक ताल मन रे, बहुरि न ऐसे होई । पीछे फिर पछतावेगा रे, नींद भरे जनि सोई ॥ टेक ॥ आगम सारे संचु करीले, तो सुख होवै तोही । प्रीति करि पीव पाइये, चरणों राखो मोही ॥ 1 ॥ संसार सागर विषम अति भारी, जनि राखै मन मोही । दादू रे जन राम नाम सौं, कश्मल देही धोई ॥ 2 ॥ 185. काल चेतावनी । भंगताल साथी ! सावधान है रहिये । पलक मांहि परमेश्वर जाणै, कहा होइ कहा कहिये ॥ टेक ॥ बाबा, बाट घाट कुछ समझ न आवै, दूर गवन हम जाना । परदेशी पंथी चलै अकेला, औघट घाट पयाना ॥ 1 ॥ बाबा, संग न साथी कोई नहीं तेरा, यहु सब हाट पसारा । तरवर पंखी सबै सिधाये, तेरा कौण गँवारा ॥ 2 ॥ बाबा, सबै बटाऊ पंथ सिरानैं, सुस्थिर नांहीं कोई । अंति काल को आगे पीछे, बिछुरत बार न होई ॥ 3 ॥ बाबा, काची काया कौण भरोसा, रैन गई क्या सोवे । दादू संबल सुकृत लीजे, सावधान किन होवे ॥ 4 ॥ 186. (गुजराती) तर्क चेतावनी । शूलताल मेरा मेरा काहे को कीजे रे, जे कुछ संग न आवे । अनत करी नें धन धरीला रे, तेंऊ तो रीता जावे ॥ टेक ॥ माया बंधन अंध न चेते रे, मेर मांहिं लपटाया । ते जाणै हूँ यह बिलासौं, अनत विरोधे खाया ॥ 1 ॥ आप स्वारथ यह विलूधा रे, आगम मरम न जाणे ।
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