भारतकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

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पृष्ठ 382

श्री दादूवाणी-राग रामकली 8 यों तो कसणी सांच सहेगा, झूठ सहै नहिं भाई ॥ 2 ॥ ज्यों घृत को ले ताता कीजे, ताइ ताइ तत्त कीन्हा। तत्तैं तत्त रहेगा भाई, झूठ सबै जल खीना ॥ 3 ॥ यों तो कसणी साच सहेगा, साचा कस कस लेवै । दादू दर्शन सांचा पावै, झूठे दरस न देवै ॥ 4 ॥ 192. करणी बिना कथनी । प्रतिपाल बातैं बाद जाहिंगी भइये, तुम जनि जानों बातनि पइये ॥ टेक ॥ जब लग अपना आप न जानै, तब लग कथनी काची । आपा जान सांई को जानै, तब कथनी सब साची ॥ 1 ॥ करनी बिना कंत नहीं पावै, कहे सुने का होई । जैसी कहै करै जे तैसी, पावैगा जन सोई ॥ 2 ॥ बातनि हीं जे निर्मल होवे, तो काहे को कस लीजे । सोना अग्नि दहै दस बारा, तब यहु प्रान पतीजे ॥ 3 ॥ यौं हम जाना मन पतियाना, करनी कठिन अपारा। दादू तन का आपा जारे, तो तिरत न लागे बारा ॥ 4 ॥ 193. उपदेश । पंजाबी-त्रिताल पंडित, राम मिलै सो कीजे । पढ़ पढ़ वेद पुराण बखानैं, सोई तत्त्व कह दीजे ॥ टेक॥ आतम रोगी विषम बियाधी, सोई कर औषधि सारा। परसत प्राणी होइ परम सुख, छूटै सब संसारा ॥ 1 ॥ ए गुण इन्द्री अग्नि अपारा, ता सन जलै शरीरा। तन मन शीतल होइ सदा सुख, सो जल नहाओ नीरा ॥ 2 ॥ सोई मार्ग हमहिं बताओ, जेहि पंथ पहुँचे पारा। भूलि न परै उलट नहीं आवै, सो कुछ करहु विचारा ॥ 3 ॥

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