भारतकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

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श्री दादूवाणी-राग रामकली 8 ........................................................................................................................

साचा राम न जाणै रे, सब झूठ बखाणै रे ॥ टेक ॥ झूठे देवा झूठी सेवा, झूठा करे पसारा। झूठी पूजा झूठी पाती, झूठा पूजणहारा ॥ 1 ॥ झूठा पाक करै रे प्राणी, झूठा भोग लगावै। झूठा आड़ा पड़दा देवै, झूठा थाल बजावै ॥ 2 ॥ झूठे वक्ता झूठे श्रोता, झूठी कथा सुणावै। झूठा कलियुग सब को मानै, झूठा भ्रम दिढ़ावै ॥ 3 ॥ स्थावर जंगम जल थल महियल, घट घट तेज समाना। दादू आतम राम हमारा, आदि पुरुष पहिचाना ॥ 4 ॥

  1. निज मार्ग निर्णय । चौताल मैं पंथी एक अपार का, मन और न भावै। सोई पंथ पावै पीव का, जिसे आप लखावै ॥ टेक ॥ को पंथी हिंदू तुरक के, को काहू राता। को पंथी सोफी सेवड़े, को सन्यासी माता ॥ 1 ॥ को पंथी जोगी जंगमा, को शक्ति पंथ ध्यावै। को पंथी कमड़े कापड़ी, को बहुत मनावै ॥ 2 ॥ को पंथी काहू के चलै, मैं और न जानूं। दादू जिन जग सिरजिया, ताही को मानूं ॥ 3 ॥

  2. साधु मिलाप मंगल । चौताल आज हमारे रामजी साधु घर आये, मंगलाचार चहुँ दिशि भये, आनन्द बधाये ॥ टेक ॥ चौक पुराऊँ मोतियां, घिस चंदन लाऊँ। पंच पदारथ पोइ के , यहु माल चढ़ाऊँ ॥ 1 ॥ तन मन धन करूँ वारनैं, प्रदक्षिणा दीजे।

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