भारतकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

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श्री दादूवाणी-राग रामकली 8

शीश हमारा जीव ले, नौछावर कीजे ॥ 2 ॥ भाव भक्ति कर प्रीति सौं, प्रेम रस पीजे । सेवा वंदन आरती, यहु लाहा लीजे ॥ 3 ॥ भाग हमारा हे सखी, सुख सागर पाया । दादू को दर्शन भया, मिले त्रिभुवन राया ॥ 4 ॥ 199. संत समागम प्रार्थना । दादरा निरंजन नाम के रस माते, कोई पूरे प्राणी राते ॥ टेक ॥ सदा सनेही राम के, सोई जन साचे । तुम बिन और न जानहीं, रंग तेरे ही राचे ॥ 1 ॥ आन न भावै एक तूं, सति साधु सोई । प्रेम पियासे पीव के, ऐसा जन कोई ॥ 2 ॥ तुम हीं जीवन उर रहे, आनन्द अनुरागी । प्रेम मगन पीव प्रितड़ी, लै तुम सौं लागी ॥ 3 ॥ जे जन तेरे रंग रंगे, दूजा रंग नांही । जन्म सुफल कर लीजिये, दादू उन मांहीं ॥ 4 ॥ 200. अत्यन्त निर्मल उपदेश । दादरा चलु रे मन ! जहाँ अमृत वना, निर्मल नीके संत जना ॥ टेक ॥ निर्गुण नांव फल अगम अपार, संतन जीवन प्राण अधार ॥ 1 ॥ सीतल छाया सुखी शरीर, चरण सरोवर निर्मल नीर ॥ 2 ॥ सुफल सदा फल बारह मास, नाना वाणी धुनि प्रकाश ॥ 3 ॥ तहाँ वास बसि अमर अनेक, तहँ चलि दादू इहै विवेक ॥ 4 ॥ 201. चौताल चलो मन माहरा, जहाँ मित्र अम्हारा ।

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