भारतकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

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श्री दादूवाणी-राग रामकली 8 तहँ जामण मरण नहिं जाणिये, नहिं जाणिये ॥ टेक ॥ मोह न माया, मेरा न तेरा, आवागमन नहीं जम फेरा ॥ 1 ॥ पिंड पड़े नहीं प्राण न छूटै, काल न लागै आयु न खूटै ॥ 2 ॥ अमर लोक तहँ अखिल शरीरा, व्याधि विकार न व्यापै पीरा ॥ 3 ॥ राम राज कोई भिड़े न भाजै, सुस्थिर रहणा बैठा छाजै ॥ 4 ॥ अलख निरंजन और न कोई, मित्र अम्हारा दादू सोई ॥ 5 ॥ 202. बेली । त्रिताल बेली आनन्द प्रेम समाइ । सहजैं मगन राम रस सींचै, दिन दिन बधती जाइ ॥ टेक ॥ सतगुरु सहजैं बाही बेली, सहज गगन घर छाया । सहजैं सहजैं कोंपल मेल्है, जाणै अवधू राया ॥ 1 ॥ आतम बेली सहजैं फूलै, सदा फूल फल होई । काया बाड़ी सहजैं निपजै, जानैं विरला कोई ॥ 2 ॥ मन हठ बेली सूखण लागी, सहजैं जुग जुग जीवै । दादू बेली अमर फल लागै, सहज सदा रस पीवै ॥ 3 ॥ 203. शब्द बाण । त्रिताल संतों ! राम बाण मोहि लागे । मारत मृग मर्म तब पायो, सब संगी मिल जागे ॥ टेक ॥ चित चेतन चिंतामणि चीन्हा, उलट अपूठा आया । मंदिर पैसि बहुरि नहिं निकसै, परम तत्त घर पाया ॥ 1 ॥ आवै न जाइ, जाइ नहिं आवै, तिहिं रस मनवा माता । पान करत परमानन्द पायो, थकित भयो चलि जाता ॥ 2 ॥ भयो अपंग पंक नहि लागै, निर्मल संग सहाई । पूर्ण ब्रह्म अखिल अविनाशी, तिहिं तज अनत न जाई ॥ 3 ॥

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