भारतकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

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श्री दादूवाणी-राग आसावरी 9 241. गुरु ज्ञान । वर्ण भिन्न ताल मेरा गुरु ऐसा ज्ञान बतावै । काल न लागै, संशय भागै, ज्यों है त्यों समझावै ॥ टेक ॥ अमर गुरु के आसन रहिये, परम ज्योति तहँ लहिये । परम तेज सो दृढ़ कर गहिये, गहिये लहिये रहिये ॥ 1 ॥ मन पवना गहि आतम खेला, सहज शून्य घर मेला । अगम अगोचर आप अकेला, अकेला मेला खेला ॥ 2 ॥ धरती अम्बर चंद न सूरा, सकल निरंतर पूरा । शब्द अनाहद बाजहिं तूरा, तूरा पूरा सूरा ॥ 3 ॥ अविचल अमर अभय पद दाता, तहाँ निरंजन राता । ज्ञान गुरु ले दादू माता, माता राता दाता ॥ 4 ॥ 242. राज विद्याधर ताल मेरा गुरु आप अकेला खेलै । आपै देवै आपै लेवै, आपै द्वै कर मेलै ॥ टेक ॥ आपै आप उपावै माया, पंच तत्त्व कर काया । जीव जन्म ले जग में आया, आया काया माया ॥ 1 ॥ धरती अंबर महल उपाया, सब जग धंधै लाया । आपै अलख निरंजन राया, राया लाया पाया ॥ 2 ॥ चन्द सूर दोइ दीपक कीन्हा, रात दिवस कर लीन्हा । राजिक रिजक सबन को दीन्हा, दीन्हा लीन्हा कीन्हा ॥ 3 ॥ परम गुरु सो प्राण हमारा, सब सुख देवै सारा । दादू खेलै अनन्त अपारा, अपारा सारा हमारा ॥ 4 ॥ 243. हैरान । राज विद्याधर ताल थकित भयो मन कह्यो न जाई, सहज समाधि रह्यो ल्यौ लाई ॥ टेक ॥

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