सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-राग आसावरी 9 आसमान नूर, जमीं नूर, पाक परवरदिगार। आब नूर, बाद नूर, खूब खूबां यार ॥ 1 ॥ जाहिर बातिन, हाजिर नाजिर, दाना तूँ दीवान। अजब अजाइब, नूर दीदम, दादू है हैरान ॥ 2 ॥ २३८. रस । त्रिताल मैं अमली मतवाला माता, प्रेम मगन मेरा मन राता ॥ टेक ॥ अमी महारस भर भर पीवै, मन मतवाला जोगी जीवै ॥ 1 ॥ रहै निरन्तर गगन मंझारी, प्रेम पियाला सहज खुमारी ॥ 2 ॥ आसण अवधू अमृतधारा, जुग जुग जीवै पीवणहारा ॥ 3 ॥ दादू अमली इहि रस माते, राम रसायन पीवत छाके ॥ 4 ॥ २३९. निज उपदेश । त्रिताल सुख दुख संशय दूर किया, तब हम केवल राम लिया ॥ टेक ॥ सुख दुख दोऊ भ्रम बिचारा, इन सौं बंध्या है जग सारा ॥ 1 ॥ मेरी मेरा सुख के तांई, जाइ जन्म नर चेतै नांहीं ॥ 2 ॥ सुख के तांई झूठा बोलै, बांधे बंधन कबहूँ न खोलै ॥ 3 ॥ दादू सुख दुख संग न जाई, प्रेम प्रीति पीव सौं ल्यौ लाई ॥ 4 ॥ २४०. हैरान । वर्णभिन्न ताल कासौं कहूँ हो अगम हरि बाताँ, गगन धरणी दिवस नहिं राता ॥ टेक ॥ संग न साथी, गुरु नहिं चेला, आसन पास यों रहै अकेला ॥ 1 ॥ वेद न भेद, न करत विचारा, अवरण वरण सबन तैं न्यारा ॥ 2 ॥ प्राण न पिंड, रूप नहिं रेखा, सोइ तत्त सार नैन बिन देखा ॥ 3 ॥ जोग न भोग, मोह नहिं माया, दादू देख काल नहिं काया ॥ 4 ॥
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