भारतकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

पृष्ठ 402, कुल 504 में से

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श्री दादूवाणी-राग आसावरी 9 .................................................................................................................................... जे कुछ कहिये सोच विचारा, ज्ञान अगोचर अगम अपारा ॥ 1 ॥ साइर बूँद कैसे कर तोलै, आप अबोल कहा कहि बोलै ॥ 2 ॥ अनल पंखि परै पर दूर, ऐसे राम रह्या भरपूर ॥ 3 ॥ अब मन मेरा ऐसे रे भाई, दादू कहबा कहण न जाई ॥ 4 ॥ 244. मल्लिका मोद ताल अविगत की गति कोइ न लहै, सब अपना उनमान कहै ॥ टेक ॥ केते ब्रह्मा वेद विचारैं, केते पंडित पाठ पढ़ें। केते अनुभव आतम खोजैं, केते सुर नर नाम रटैं ॥ 1 ॥ केते ईश्वर आसन बैठे, केते जोगी ध्यान धरैं । केते मुनिवर मन को मारैं, केते ज्ञानी ज्ञान करैं ॥ 2 ॥ केते पीर केते पैगम्बर, केते पढ़ें कुराना । केते काजी केते मुल्लां, केते शेख शयाना ॥ 3 ॥ केते पारिख अन्त न पावैं, वार पार कछु नांहीं । दादू कीमत कोई न जानैं, केते आवैं जांहीं ॥ 4 ॥ 245. मल्लिका मोद ताल ए हौं बूझि रही पीव जैसा है, तैसा कोइ न कहै रे । अगम अगाध अपार अगोचर, सुधि बुधि कोइ न लहै रे ॥ टेक ॥ वार पार कोइ अन्त न पावै, आदि अन्त मधि नांही रे । खरे सयाने भये दिवाने, कैसा कहाँ रहै रे ॥ 1 ॥ ब्रह्मा विष्णु महेश्वर बूझै, केता कोई बतावै रे । शेख मुशायक पीर पैगम्बर, है कोइ अगह गहै रे ॥ 2 ॥ अम्बर धरती सूर ससि बूझै, बाव वर्ण सब सोधै रे । दादू चक्रित है हैराना, को है कर्म दहै रे ॥ 3 ॥ इति राग आसावरी सम्पूर्ण ॥ 9 ॥ पद 32 ॥

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