सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
DevanagariHindipublished504 पृष्ठ
पृष्ठ 403, कुल 504 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 403
राग सिन्दूरा अथ राग सिन्दूरा 10 (गायन समय रात्रि 12 से 3) 246. परिचय । झपताल हंस सरोवर तहाँ रमै, सुभर हरि जल नीर। प्राणी आप पखालिये, निर्मल सदा होइ शरीर ॥ टेक॥ मुक्ताहल मन मानिया, चुगैं हंस सुजान। मध्य निरंतर झूलिये, मधुर विमल रस पान ॥ 1 ॥ भँवर कमल रस वासना, रातो राम पीवंत। अरस परस आनन्द करैं, तहँ मन सदा होइ जीवंत ॥ 2 ॥ मीन मगन मांहीं रहैं, मुदित सरोवर मांहिं। सुख सागर क्रीड़ा करैं, पूरण परिमित नांहिं ॥ 3 ॥ निर्भय तहाँ भय को नहीं, विलसैं बारम्बार। दादू दर्शन कीजिये, सन्मुख सिरजनहार ॥ 4 ॥
- 403 -