सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
DevanagariHindipublished504 पृष्ठ
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अथ राग (कल्हेरौ) कालिंगड़ा 12 (गायन समय प्रभात 3 से 6) 257. (गुजराती) विनती। रंग ताल वाल्हा, हूँ ताहरी, तूँ माहरो नाथ । तुम सौं पहली प्रीतड़ी, पूरबलो साथ ॥ टेक ॥ वाल्हा मैं तूँ म्हारो ओलखियो रे, राखिस तूँनें हृदा मंझारि । हूँ पामूं पीव आपणों रे, त्रिभुवन दाता देव मुरारि ॥ 1 ॥ वाल्हा मन माहरो मन मांही राखिस, आत्म एक निरंजन देव । चित मांहैं चित सदा निरंतर, येणी पेरे तुम्हारी सेव ॥ 2 ॥ वाल्हा भाव भक्ति हरि भजन तुम्हारो, प्रेमें पूरि कँवल विगास। अभि-अंतर आनन्द अविनाशी, दादू नी एह्रैं पूरवी आस ॥ 3 ॥
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