भारतकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

पृष्ठ 410, कुल 504 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 410

अथ राग (कल्हेरौ) कालिंगड़ा 12 (गायन समय प्रभात 3 से 6) 257. (गुजराती) विनती। रंग ताल वाल्हा, हूँ ताहरी, तूँ माहरो नाथ । तुम सौं पहली प्रीतड़ी, पूरबलो साथ ॥ टेक ॥ वाल्हा मैं तूँ म्हारो ओलखियो रे, राखिस तूँनें हृदा मंझारि । हूँ पामूं पीव आपणों रे, त्रिभुवन दाता देव मुरारि ॥ 1 ॥ वाल्हा मन माहरो मन मांही राखिस, आत्म एक निरंजन देव । चित मांहैं चित सदा निरंतर, येणी पेरे तुम्हारी सेव ॥ 2 ॥ वाल्हा भाव भक्ति हरि भजन तुम्हारो, प्रेमें पूरि कँवल विगास। अभि-अंतर आनन्द अविनाशी, दादू नी एह्रैं पूरवी आस ॥ 3 ॥

  • 410 -