सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
DevanagariHindipublished504 पृष्ठ
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श्री दादूवाणी-राग कलिंगड़ा 12 258. (गुजराती) उपदेश चेतावनी। वर्ण भिन्नताल वारीवार कहूँ रे गहिला, राम राम कांइ विसाऱ्यो रे । जनम अमोलक पामियो, एह्वो रतन कांई हाऱ्यो रे ॥ टेक ॥ विषया बाह्यो नें तहँ धायो, कीधो नहिं मारो वाऱ्यो रे । माया धन जोई नें भूल्यो, सर्वस येणें हाऱ्यो रे ॥ 1 ॥ गर्भवास देह दमतो प्राणी, आश्रम तेह संभाऱ्यो रे । दादू रे जन राम भणीजे, नहिं तो जथा विधि हाऱ्यो रे ॥ 2 ॥ इति राग कालिंगडा सम्पूर्णः ॥ 12 ॥ 2 पद ॥
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