भारतकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

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राग परजिया www.dadooram.org अथ राग परजिया (परज) 13 (गायन समय रात्रि 3 से 6) 259. परिचय । खेमटा ताल नूर रह्या भरपूर, अमी रस पीजिये, रस मांही रस होइ, लाहा लीजिये ॥ टेक ॥ प्रकट तेज अनन्त, पार नहिं पाइये । झिलमिल झिलमिल होइ, तहाँ मन लाइये ॥ 1 ॥ सहजैं सदा प्रकाश, ज्योति जल पूरिया । तहाँ रहें निज दास, सेवक सूरिया ॥ 2 ॥ सुख सागर वार न पार, हमारा वास है । हंस रहें ता मांहिं, दादू दास है ॥ 3 ॥ इति राग परजिया सम्पूर्णः ॥ 13 ॥ पद 1 ॥

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