भारतकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

पृष्ठ 417, कुल 504 में से

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श्री दादूवाणी-राग सारंग 15 २6४. परिचय उपदेश । त्रिताल चल-चल रे मन तहाँ जाइये । चरण बिन चालिबो, श्रवण बिन सुनिबो, बिन कर बैन बजाइये ॥ टेक ॥ तन नाहीं जहाँ, मन नाहीं तहँ, प्राण नहीं तहँ आइये । शब्द नहीं जहाँ, जीव नहीं तहँ, बिन रसना मुख गाइये ॥ 1 ॥ पवन पावक नहीं, धरणी अंबर नहीं, उभय नहीं तहँ लाइये । चन्द नहीं जहाँ, सूर नहीं तहँ, परम ज्योति सुख पाइये ॥ 2 ॥ तेज पुंज सो सुख का सागर, झिलमिल नूर नहाइये । तहँ चल दादू अगम अगोचर, तामैं सहज समाइये ॥ 3 ॥ इति राग सारंग सम्पूर्णः ॥ 15 ॥ पद 5 ॥

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