सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
DevanagariHindipublished504 पृष्ठ
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अथ राग टोडी (तोडी) 16 (गायन समय दिन 6 से 12) 269. स्मरण उपदेश । राज मृगांक ताल सो तत सहजैं सुषमन कहणा, साँच पकड़ मन जुग जुग रहणा ।। टेक ।। प्रेम प्रीति कर नीका राखै, बारम्बार सहज नर भाषै ।। 1 ।। मुख हिरदै सो सहज संभारै, तिहि तत रहणा कदे न विसारै ।। 2 ।। अन्तर सोई नीका जाणै, निमिष न बिसरै ब्रह्म बखाणै ।। 3 ।। सोई सुजाण सुधा रस पीवै, दादू देखि जुग जुग जीवै ।। 4 ।। 270. नाम महिमा । राज मृंगाक ताल नाँव रे नाँव रे, नाँव रे नाँव रे,
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