सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-राग टोडी(तोडी) 16 सकल शिरोमणि नाँव रे, मै बलिहारी जाँव रे ॥ टेक ॥ दुस्तर तारै, पार उतारै, नरक निवारै नाँव रे ॥ 1 ॥ तारणहारा, भवजल पारा, निरमल सारा नाँव रे ॥ 2 ॥ नूर दिखावै, तेज मिलावै, ज्योति जगावै नाँव रे ॥ 3 ॥ सब कुछ दाता, अमृत राता, दादू माता नाँव रे ॥ 4 ॥ 271. केवल विनती । राज विद्याधर ताल राइ रे राइ रे, सकल भुवनपति राइ रे, अमृत देहु अघाइ रे राइ ॥ टेक ॥ प्रगट राता, प्रगट माता, प्रगट नूर दिखाइ रेराइ ॥ 1 ॥ सुस्थिर ज्ञाना, सुस्थिर ध्याना, सुस्थिर तेज मिलाइ रेराइ ॥ 2 ॥ अविचल मेला, अविचल खेला, अविचल ज्योति समाइ रे राइ ॥ 3 ॥ निहचल बैना, निहचल नैना, दादू बलि बलि जाइ रे राइ ॥ 4 ॥ 272. रसिक अवस्था । सवारी ताल हरि रस माते मगन भये । सुमिर सुमिर भये मतवाले, जामण मरण सब भूल गये ॥ टेक ॥ निर्मल भक्ति प्रेम रस पीवैं, आन न दूजा भाव धरैं । सहजैं सदा राम रंग राते, मुक्ति वैकुंठैं कहा करैं ॥ 1 ॥ गाइ गाइ रस लीन भये हैं, कछू न मांगैं संत जना । और अनेक देहु दत्त आगै, आन न भावै राम बिना ॥ 2 ॥ इक टग ध्यान रहैं ल्यौ लागे, छाकि परे हरि रस पीवैं । दादू मगन रहैं रस माते, ऐसे हरि के जन जीवैं ॥ 3 ॥ 273. (गुजराती) केवल विनती । सवारी ताल ते मैं कीधेला राम ! जे तैं वाज्या ते ।
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