सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
DevanagariHindipublished504 पृष्ठ
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राग बिलावल www.dadooram.org अथ राग बिलावल २१ (गायन समय प्रातः 6 से 9) ३३३. परिचय विनती । त्रिताल दया तुम्हारी दर्शन पड्ये । जानत हो तुम अंतरजामी, जानराय तुम सौं कहा कहिये ॥ टेक ॥ तुम सौं कहा चतुराई कीजै, कौण कर्म कर तुम पाये । को नहीं मिले प्राण बल अपने, दया तुम्हारी तुम आये ॥ 1 ॥ कहा हमारो आन तुम आगे, कौन कला कर वश किये । जीते कौन बुद्धि बल पौरुष, रुचि अपनी तैं सरण लिये ॥ 2 ॥ तुम ही आदि अंत पुनि तुम ही, तुम कर्ता त्रय लोक मंझार । कुछ नांही तैं कहा होत है, दादू बलि पावे दीदार ॥ 3 ॥
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