भारतकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

पृष्ठ 452, कुल 504 में से

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पृष्ठ 452

तब तैं अंग और नहीं आवै, देखत हूँ सुखदाई ॥ टेक ॥ ता दिन तैं तन ताप न व्यापै, सुख दुख संग न जाऊँ । पावन पीव परस पद लीन्हा, आनंद भर गुन गाऊँ ॥ 1 ॥ सब सौं संग नहीं पुनि मेरे, अरस परस कुछ नाँहीं । एक अनंत सोई संग मेरे, निरखत हूँ निज मांहीं ॥ 2 ॥ तन मन मांहिं शोध सो लीन्हा, निरखत हूँ निज सारा । सोई संग सबै सुखदाई, दादू भाग्य हमारा ॥ 3 ॥ 345. सच निदान । राज मृगांक ताल हरि बिन निहचल कहीं न देखूं, तीन लोक फिरि सोधा रे । जे दीसै सो विनश जायगा, ऐसा गुरु परमोधा रे ॥ टेक ॥ धरती गगन पवन अरु पानी, चंद सूर थिर नाँहीं रे । रैनि दिवस रहत नहिं दीसै, एक रहै कलि मांहीं रे ॥ 1 ॥ पीर पैगम्बर शेख मुशायख, शिव विरंचि सब देवा रे । कलि आया सो कोई न रहसी, रहसी अलख अभेवा रे ॥ 2 ॥ सवा लाख मेरु गिरि पर्वत, समंद न रहसी थीरा रे । नदी निवान कछू नहिं दीसै, रहसी अकल शरीरा रे ॥ 3 ॥ अविनाशी वह एक रहेगा, जिन यहु सब कुछ कीन्हा रे । दादू जाता सब जग देखूं, एक रहत सो चीन्हा रे ॥ 4 ॥ 346. पतिव्रत । राज विद्याधर ताल मूल सींच बधै ज्यों बेला, सो तत तरुवर रहै अकेला ॥ टेक ॥ देवी देखत फिरै ज्यों भूलै, खाइ हलाहल विष को फूलै । सुख को चाहे पड़ै गल फाँसी, देखत हीरा हाथ तैं जासी ॥ 1 ॥ केई पूजा रच ध्यान लगावैं, देवल देखें खबर न पावैं । तोरैं पाती जुगति न जानी, इहि भ्रम भूल रहै अभिमानी ॥ 2 ॥