भारतकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

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राग सूहा अथ राग सूहा २२ (गायन समय दिन 9 से 12) 354. विनती । एक ताल तुम बिच अंतर जनि परै, माधव ! भावै तन धन लेहु । भावै स्वर्ग नरक रसातल, भावै करवत देहु ॥ टेक ॥ भावै विपति देहु दुख संकट, भावै संपति सुख शरीर । भावै घर वन राव रंक कर, भावै सागर तीर, माधव ॥ 1 ॥ भावै बँध मुक्त कर, माधव ! भावै त्रिभुवन सार । भावै सकल दोष धर माधव, भावै सकल निवार, माधव ॥ 2 ॥ भावै धरणि गगन धर, माधव ! भावै शीतल सूर । दादू निकटि सदा संग, माधव ! तूँ जनि होवै दूर, माधव ॥ 3 ॥

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