सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
DevanagariHindipublished504 पृष्ठ
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राग बसंत www.dadooram.org अथ राग बसंत २४ (गायन समय प्रभात ३ से ६ तथा बसंत ऋतु) ३६४. भजन भेद । मल्लिका मोद ताल निर्मल ना मन लीयो जाइ, जाके भाग बड़े सोई फल खाइ ॥ टेक ॥ मन माया मोह मद माते, कर्म कठिन ता मांहि परे । विषय विकार मान मन मांही, सकल मनोरथ स्वाद खरे ॥ १ ॥ काम क्रोध ये काल कल्पना, मैं मैं मेरी अति अहंकार । तृष्णा तृप्ति न मानै कबहूँ, सदा कुसंगी पाँच विकार ॥ २ ॥ अनेक जोध रहैं रखवाले, दुर्लभ दूर फल अगम अपार । जाके भाग बड़े सोई फल पावै, दादू दाता सिरजनहार ॥ ३ ॥ ३६५. (गुजराती) विरह । धीमी ताल
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