भारतकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

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श्री दादूवाणी-राग बसंत 24 तूँ घर आवने माहरे रे, हूँ जाऊँ वारणे ताहरे रे ॥ टेक ॥ रैन दिवस मूनै निरखतां जाये । वेलो थई घर आवे रे, वाहला आकुल थाये ॥ 1 ॥ तिल तिल हौं तो तारी वाटड़ी जोऊँ । एने रे आँसूड़े वाहला, मुखड़ो धोऊँ ॥ 2 ॥ ताहरी दया करि घर आवे रे वाहला । दादू तो ताहरो छे रे, मा कर टाला ॥ 3 ॥ 366. करूणा विनती । तेवरा ताल मोहन दुख दीरघ तूँ निवार, मोहि सतावै बारम्बार ॥ टेक ॥ काम कठिन घट रहै मांहि, तातैं ज्ञान ध्यान दोउ उदै नांहि । गति मति मोहन विकल मोर, तातैं चित्त न आवै नाम तोर ॥ 1 ॥ पाँचों द्वन्दर देह पूरि, तातैं सहज शील सत रहैं दूरि । सुधि बुधि मेरी गई भाज, तातैं तुम विसरे महाराज ॥ 2 ॥ क्रोध न कबहुँ तजै संग, तातैं भाव भजन का होइ भंग । समझि न काई मन मंझारि, तातैं चरण विमुख भये श्री मुरारि ॥ 3 ॥ अन्तरजामी कर सहाइ, तेरो दीन दुखित भयो जन्म जाइ । त्राहि त्राहि प्रभु तूँ दयाल, कहै दादू हरि कर संभाल ॥ 4 ॥ 367. मन स्थिरार्थ विनती । एक ताल मेरे मोहन मूरति राखि मोहि, निसवासर गुण रमूं तोहि ॥ टेक ॥ मन मीन होइ ज्यों स्वाद खाइ, लालच लागो जल तैं जाइ । मन हस्ती मातो अपार, काम अंध गज लहै न सार ॥ 1 ॥ मन पतंग पावक परै, अग्नि न देखै ज्यों जरै । मन मृगा ज्यों सुनै नाद, प्राण तजै यूं जाइ बाद ॥ 2 ॥ मन मधुकर जैसे लुब्धि वास, कँवल बँधावै होइ नास ।

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