भारतकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

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पृष्ठ 476

श्री दादूवाणी-राग भैरूं 25 दादू निन्दा ताको भावै, जाकै हिरदै राम न आवै ॥ 6 ॥ ३९४. (गुजराती) अनन्य शरण । उदीक्षण ताल महारूं सूं जेहूँ आपूं, ताहरूं छै तूंनें थापूं ॥ टेक ॥ सर्व जीव नें तूं दातार, तैं सिरज्या नें तूं प्रतिपाल ॥ 1 ॥ तन धन ताहरो तैं दीधो, हूँ ताहरो नें तैं कीधो ॥ 2 ॥ सहुवे ताहरो सांचो ये, मैं मैं माहरो झूठो ते ॥ 3 ॥ दादू नें मन और न आवे, तूं कर्ता ने तूं हि जु भावे ॥ 4 ॥ ३९९. निष्काम । उदीक्षण ताल ऐसा अवधू राम पियारा, प्राण पिंड तैं रहै नियारा ॥ टेक ॥ जल लग काया तब लग माया, रहै निरन्तर अवधू राया ॥ 1 ॥ अठ सिधि भाई नो निधि आई, निकट न जाई राम दुहाई ॥ 2 ॥ अमर अभय पद बैकुंठ बासा, छाया माया रहै उदासा ॥ 3 ॥ सांई सेवक सब दिखलावै, दादू दूजा दृष्टि न आवै ॥ 4 ॥ ५००. शूरातन कसौटी । भंगताल तूँ साहिब मैं सेवक तेरा, भावै सिर दे सूली मेरा ॥ टेक ॥ भावै करवत सिर पर सार, भावै लेकर गरदन मार ॥ 1 ॥ भावै चहुँ दिशि अग्नि लगाइ, भावै काल दशों दिशि खाइ ॥ 2 ॥ भावै गिरिवर गगन गिराइ, भावै दरिया माँहि बहाइ ॥ 3 ॥ भावै कनक कसौटी देहु, दादू सेवक कस कस लेहु ॥ 4 ॥ ५०1. साधु । भंगताल काम क्रोध नहिं आवै मेरे, तातैं गोविन्द पाया नेरे ॥ टेक ॥ भरम कर्म जाल सब दीन्हा, रमता राम सबन में चीन्हा ॥ 1 ॥

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