भारतकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

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श्री दादूवाणी-स्मरण का अंग 2 देह पियारी जीव को, जीव पियारा देह। दादू हरि रस पाइये, जे ऐसा होइ स्नेह ॥ 26 ॥ प्रेमा भक्ति के बिना सब फीका है दादू हरदम मांहि दिवान, सेज हमारी पीव है। देखूँ सो सुबहान, ये इश्क हमारा जीव है ॥ 27 ॥ दादू हरदम मांहि दिवान, कहूँ दरूने दर्द सौं। दर्द दरूने जाइ, जब देखूँ दीदार कों ॥ 28 ॥ विरह विनती दादू दरूने दर्दबंद, यहु दिल दर्द न जाइ। हम दुखिया दीदार के, महरबान दिखलाइ ॥ 29 ॥ मूये पीड़ पुकारतां, बैद न मिलिया आइ। दादू थोड़ी बात थी, जे टुक दर्श दिखाइ ॥ 30 ॥ दादू मैं भिखारी मंगता, दर्शन देहु दयाल। तुम दाता दुख भंजता, मेरी करहु संभाल ॥ 31 ॥ छिन बिछोह क्या जीये में जीवना, बिन दर्शन बेहाल। दादू सोई जीवना, प्रकट परसन लाल ॥ 32 ॥ इहि जग जीवन सो भला, जब लग हिरदै राम। राम बिना जे जीवना, सो दादू बेकाम ॥ 33 ॥ विरह विनती दादू कहु दीदार की, सांई सेती बात। कब हरि दरशन देहुगे, यहु औसर चलि जात ॥ 34 ॥ बिथा तुम्हारे दर्श की, मोहि व्यापै दिन रात। दुखी न कीजे दीन को, दर्शन दीजे तात ॥ 35 ॥ दादू इस हियड़े ये साल, पीव बिन क्योंहि न जाइसी। जब देखूँ मेरा लाल, तब रोम रोम सुख आइसी ॥ 36 ॥

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