भारतकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

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श्री दादूवाणी-स्मरण का अंग 2 तूं है तैसा प्रकाश कर, अपना आप दिखाइ । दादू को दीदार दे, बलि जाऊँ विलंब न लाइ ॥ 37 ॥ दादू पिव जी देखै मुझ को, हौं भी देखूँ पीव । हौं देखूँ देखत मिलै, तो सुख पावै जीव ॥ 38 ॥ विरह कसौटी दादू कहै, तन मन तुम पर वारणैं, कर दीजे कै बार । जे ऐसी विधि पाइये, तो लीजे सिरजनहार ॥ 39 ॥ विरह पतिव्रत दीन दुनी सदके करूँ, टुक देखण दे दीदार । तन मन भी छिन छिन करूँ, भिस्त दोजग भी वार ॥ 40 ॥ दादू हम दुखिया दीदार के, तूं दिल थैं दूरि न होइ । भावै हमको जाल दे, होना है सो होइ ॥ 41 ॥ विरह पतिव्रत दादू कहै, जे कुछ दिया हमको, सो सब तुम ही लेहु । तुम बिन मन मानै नहीं, दरस आपणां देहु ॥ 42 ॥ दूजा कुछ मांगै नहीं, हमको दे दीदार । तूं है तब लग एक टग, दादू के दिलदार ॥ 43 ॥ दादू कहै, तूं है तैसी भक्ति दे, तूं है तैसा प्रेम । तूं है तैसी सुरति दे, तूं है तैसा खेम ॥ 44 ॥ दादू कहै, सदिके करूँ शरीर को, बेर बेर बहु भंत । भाव भक्ति हित प्रेम ल्यौ, खरा पियारा कंत ॥ 45 ॥ दादू दर्शन की रली, हम को बहुत अपार । क्या जाणूं कबही मिले, मेरा प्राण आधार ॥ 46 ॥ दादू कारण कंत के, खरा दुखी बेहाल । मीरां मेरा महर कर, दे दर्शन दरहाल ॥ 47 ॥

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