सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-स्मरण का अंग 2
ताला बेली प्यास बिन, क्यों रस पीया जाइ । विरहा दर्शन दर्द सौं, हमको देहु खुदाइ ॥ 48 ॥ ताला बेली पीड़ सौं, विरहा प्रेम पियास । दर्शन सेती दीजिये, बिलसै दादू दास ॥ 49 ॥ दादू कहै, हमको अपणां आप दे, इश्क मुहब्बत दर्द । सेज सुहाग सुख प्रेम रस, मिल खेलैं लापर्द ॥ 50 ॥ प्रेम भगति माता रहै, ताला बेली अंग । सदा सपीड़ा मन रहै, राम रमै उन संग ॥ 51 ॥ प्रेम मगन रस पाइये, भक्ति हेत रुचि भाव । विरह बेसास निज नाम सौं, देव दया कर आव ॥ 52 ॥ गई दशा सब बाहुड़ै, जे तुम प्रकटहु आइ । दादू ऊजड़ सब बसै, दर्शन देहु दिखाइ ॥ 53 ॥ हम कसिये क्या होइगा, बिड़द तुम्हारा जाइ । पीछै ही पछिताहुगे, ताथैं प्रकटहु आइ ॥ 54 ॥ छिन बिछोह मीयां मैंडा आव घर, वांढी वंता लोइ । डुखंडे मुहिंडे गये, मरां विच्छौहे रोइ ॥ 55 ॥ विरह पतिव्रत है, सो निधि नहिं पाइये, नहीं, सो है भरपूर । दादू मन मानै नहीं, ताथैं मरिये झूर ॥ 56 ॥ विरही विरह लक्षण जिस घट इश्क अलाह का, तिस घट लोही न मांस । दादू जियरे जक नहीं, ससकै सांसैं सांस ॥ 57 ॥ रत्ती रब्ब ना बीसरै, मरै संभाल संभाल । दादू सुहदा थीर है,आसिक अल्लह नाल ॥ 58 ॥
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