भारतकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

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श्री दादूवाणी-स्मरण का अंग 2 दादू तो पीव पाइये, भावै प्रीति लगाइ । हेजैं हरि बुलाइये, मोहन मंदिर आइ ॥ 115 ॥ विरह उपजन दादू जाके जैसी पीड़ है, सो तैसी करै पुकार। को सूक्ष्म, को सहज में, को मृतक तिहिं बार ॥ 116 ॥ विरह लक्षण दर्द हि बूझै दर्दवंद, जाके दिल होवे । क्या जाणै दादू दर्द की, नींद भरि सोवे ॥ 117 ॥ करणी बिना कथनी दादू अक्षर प्रेम का, कोइ पढ़ेगा एक। दादू पुस्तक प्रेम बिन, केते पढें अनेक ॥ 118 ॥ दादू पाती प्रेम की, बिरला बांचै कोइ । वेद पुरान पुस्तक पढे, प्रेम बिना क्या होइ ॥ 119 ॥ विरह बाण दादू कर बिन, शर बिन, कमान बिन, मारे खैंचि कसीस । लागी चोट शरीर में, नखशिख सालै सीस ॥ 120 ॥ दादू भलका मारे भेद सौं, सालै मंझि पराण । मारणहारा जाणि है, कै जिहिं लागे बाण ॥ 121 ॥ दादू सो शर हमको मार ले, जिहिं शर मिलिये जाइ । निशदिन मारग देखिये, कबहुँ लागे आइ ॥ 122 ॥ दादू मारे प्रेम सौं, बेधे साध सुजाण । मारणहारे को मिले, दादू बिरही बाण ॥ 123 ॥ जिहि लागी सो जागि है, बेध्या करै पुकार । दादू पिंजर पीड़ है, सालै बारम्बार ॥ 124 ॥ विरही सिसकै पीड़ सौं, ज्यूं घायल रण माहिं। प्रीतम मारे बाण भर, दादू जीवै नाहिं ॥ 125 ॥

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