सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
DevanagariHindipublished504 पृष्ठ
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श्री दादूवाणी-स्मरण का अंग 2 वसुधा सब फूलै फलै, पृथ्वी अनंत अपार । गगन गर्ज जल थल भरै, दादू जै जै कार ।। 158 ।। काला मुँह कर काल का, सांई सदा सुकाल । मेघ तुम्हारे घर घणां, बरसहु दीनदयाल ।। 159 ।। इति श्री दादूदास-विरचिते सतगुरु-प्रसादेन प्रोक्तं भक्ति योगनाम तत्वसारमत-सर्वसाधुर्बुद्धिज्ञान-सर्वशास्त्र-शोधितं रामनाम सतगुरुशिक्षा धर्मशास्त्र-सत्योपदेश-ब्रह्मविद्यायां मनुष्य जीवनाम् नित्य-श्रवणं पठनं मोक्षदायकम् श्री दादूवाणीनाम् माहात्म्य तृतीयो विरह का अंग सम्पूर्ण ।। अंग 3 ।। साखी 159 ।। दादूराम राम सत्यराम
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